भारत इंफो : विदेश में रोजी-रोटी कमाने की चाहत लेकर गए भारतीय युवाओं के लिए रूस-यूक्रेन युद्ध काल बन गया है। रूसी सेना में शामिल होकर यूक्रेन के खिलाफ लड़ रहे 10 भारतीय युवकों की मौत की पुष्टि हुई है। इन मृतकों में तीन युवक पंजाब के रहने वाले थे, जबकि अन्य सात उत्तर प्रदेश और जम्मू से संबंधित थे। लंबे समय से अपने बच्चों की सुरक्षित वापसी की राह देख रहे माता-पिता को जब उनकी शहादत की खबर मिली, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। इस दुखद खुलासे के बाद अब मृतकों के परिवारों में मातम पसरा हुआ है और वे अपने बच्चों के शवों की वापसी की गुहार लगा रहे हैं।
अपनों की तलाश में दो बार रूस गए जगदीप सिंह
इस पूरे मामले को दुनिया के सामने लाने में जगदीप कुमार नामक युवक की बड़ी भूमिका रही है। जगदीप का अपना भाई मनदीप भी रूसी सेना में फंसा हुआ था, जिसकी तलाश में वह दो बार रूस की यात्रा कर चुके हैं। जगदीप ने बताया कि वह पहली बार 21 दिनों के लिए रूस गए थे, लेकिन भाषा की समस्या और युद्ध के हालातों के कारण उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। हार न मानते हुए उन्होंने दूसरी बार रूस में दो महीने बिताए और मॉस्को सहित कई इलाकों में भारतीय युवाओं की तलाश की। उनकी इस खोजबीन के दौरान ही रूसी सेना के दस्तावेजों के जरिए इन 10 युवाओं की मौत की जानकारी सामने आई।
राज्यसभा सांसद संत सीचेवाल के प्रयासों से हुआ खुलासा
भारत लौटने के बाद जगदीप कुमार ने राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल के कार्यालय में सभी महत्वपूर्ण दस्तावेज जमा कराए हैं। जगदीप ने बताया कि संत सीचेवाल ने उन्हें रूस जाने के लिए टिकट और सिफारिशी पत्र दिलाने में पूरी मदद की थी। जगदीप ने सबसे पहले जून 2024 में संत सीचेवाल से मुलाकात कर अपने भाई और अन्य युवाओं को बचाने की अपील की थी। इसके बाद संत सीचेवाल ने विदेश मंत्री को पत्र लिखकर इन युवाओं की सुरक्षित वापसी की मांग उठाई थी। उनके लगातार प्रयासों के कारण ही अब तक कई भारतीय युवक सुरक्षित अपने वतन लौट सके हैं, लेकिन इन 10 युवाओं की मौत की खबर ने सबको झकझोर कर रख दिया है।
मृतकों और लापता युवाओं की सूची आई सामने
जगदीप द्वारा जुटाए गए दस्तावेजों के अनुसार, जिन 10 भारतीयों की रूसी सेना में मौत हो चुकी है उनमें अमृतसर के तेजपाल सिंह, लखनऊ के अरविंद कुमार, उत्तर प्रदेश के धीरेंद्र कुमार, विनोद यादव और योगेंद्र यादव सहित पांच अन्य शामिल हैं। इसके अलावा चार भारतीय अभी भी लापता बताए जा रहे हैं, जिनकी पहचान दीपक, योगेश्वर प्रसाद, अजहरुद्दीन खान और राम चंद्र के रूप में हुई है। इन युवाओं के परिजनों को लंबे समय तक अंधेरे में रखा गया और उन्हें काफी समय बाद पता चला कि उनके बेटे युद्ध की भेंट चढ़ चुके हैं।
केंद्र सरकार से भर्ती रोकने और शवों को वापस लाने की मांग
इस गंभीर स्थिति पर राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने केंद्र सरकार से हस्तक्षेप करने की पुरजोर अपील की है। उन्होंने भारत सरकार से मांग की है कि वह अपने कूटनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर रूसी सेना में भारतीय युवाओं की भर्ती पर पूरी तरह से रोक लगवाए। संत सीचेवाल ने विदेश मंत्री को फिर से पत्र लिखकर आग्रह किया है कि जो युवा शहीद हो चुके हैं, उनके शवों को जल्द से जल्द भारत लाया जाए ताकि उनके परिजन अपनी धार्मिक परंपराओं के अनुसार अंतिम संस्कार कर सकें। साथ ही, उन्होंने उन धोखेबाज ट्रैवल एजेंटों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है जो मासूम युवाओं को बहला-फुसलाकर मौत के मुंह में धकेल रहे हैं।