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भारतीय हॉकी जगत को अपूरणीय क्षति, 1980 ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता दविंदर सिंह गरचा का निधन

भारत इंफो : भारतीय खेल जगत के लिए आज एक अत्यंत दुखद समाचार है। 1980 के मास्को ओलंपिक में भारत को स्वर्ण पदक दिलाने वाले दिग्गज हॉकी खिलाड़ी और सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी दविंदर सिंह गरचा अब हमारे बीच नहीं रहे। 7 दिसंबर 1952 को जन्मे श्री गरचा ने न केवल खेल के मैदान पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया, बल्कि पुलिस प्रशासन में भी अपनी गौरवशाली सेवाएं प्रदान कीं। उनके निधन की खबर से खेल प्रेमियों और हॉकी बिरादरी में शोक की लहर दौड़ गई है।

मैदान पर स्वर्णिम सफर और ऐतिहासिक रिकॉर्ड
दविंदर सिंह गरचा भारतीय हॉकी के उस स्वर्णिम युग के प्रमुख स्तंभ थे जब भारत ने 1980 के समर ओलंपिक्स में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रचा था। उस ऐतिहासिक टूर्नामेंट में गरचा का प्रदर्शन असाधारण रहा था। उन्होंने कुल 6 ओलंपिक मैचों में शानदार 8 गोल दागे थे, जो उनकी आक्रामक खेल शैली का प्रमाण था। अपने अंतरराष्ट्रीय करियर के दौरान उन्होंने महज तीन बड़े टूर्नामेंटों में हिस्सा लिया, जिनमें उन्होंने 30 से अधिक मैच खेले और कुल 19 गोल अपने नाम किए। खेल के प्रति उनकी इसी कुशलता ने उन्हें भारतीय हॉकी के नायकों की श्रेणी में खड़ा किया।

प्रशासनिक सेवा और खेल को समर्पित जीवन
हॉकी से संन्यास लेने के बाद भी खेल के प्रति उनका लगाव कभी कम नहीं हुआ। वे प्रसिद्ध मोहिंदर सिंह मुंशी हॉकी टूर्नामेंट के अध्यक्ष के रूप में नई प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने में जुटे रहे। सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी के रूप में समाज में उनका विशेष सम्मान था। उनके निधन पर जालंधर की प्रसिद्ध सुरजीत हॉकी सोसाइटी ने गहरी संवेदना व्यक्त की है। सोसाइटी के सीईओ इकबाल सिंह संधू (रिटायर्ड पीसीएस) और सभी सदस्यों ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और परिवार को इस कठिन समय में संबल देने की कामना की है। उनके अंतिम संस्कार की तिथि और समय की घोषणा जल्द ही की जाएगी।

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