अपनी ही एंटी-ड्रोन यूनिट के कांस्टेबल की गतिविधियों से बेखबर रही पंजाब पुलिस
नशे की लत और तस्करी नेटवर्क से कथित संबंधों की नहीं लगी भनक
पंजाब पुलिस की कोई इनपुट नहीं थी: अतुल फुलजेले, आईजी, बीएसएफ पंजाब फ्रंटियर
सीमा पर निगरानी और पुलिस के आंतरिक तंत्र पर उठे गंभीर सवाल, अधिकारियों की भी हो सकती है मिलीभगत
मनुपाल शर्मा, जालंधर
पंजाब में नशे के खिलाफ युद्ध, तस्करों की अवैध संपत्तियों पर पीला पंजा और सीमा पार से ड्रोन के जरिए गिराई जाने वाली नशीले पदार्थों की खेप रोकने के लिए चलाए जा रहे अभियानों के बीच नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) और बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (बीएसएफ) की तरफ से 15 किलोग्राम हेरोइन के साथ पंजाब पुलिस के एक कांस्टेबल की गिरफ्तारी ने पंजाब पुलिस को आइना दिखा डाला है। विडंबना यह है कि गिरफ्तार कांस्टेबल उसी एंटी-ड्रोन यूनिट में तैनात था, जिसका काम सीमा पार से ड्रोन के जरिए आने वाली नशे की खेप को पकड़ना है।
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) और सीमा सुरक्षा बल (BSF) के संयुक्त ऑपरेशन में कांस्टेबल करनदीप सिंह की गिरफ्तारी ने पंजाब पुलिस की आंतरिक निगरानी व्यवस्था को कठघरे में ला खड़ा किया है। यह तो अब साफ हो गया है कि पंजाब पुलिस के पास अपने कर्मचारियों के नशेड़ी होने तथा उसके तस्करी में लिप्त होने संबंधी कोई जानकारी ही नहीं थी। अथवा पंजाब पुलिस का ही कोई अधिकारी उसे संरक्षण प्रदान कर रहा था। खास यह है कि पंजाब पुलिस की तरफ से एनसीबी अथवा बीएसएफ को सीमा पर चल रहे इस गड़बड़झाले की कोई इनपुट भी प्रदान नहीं की गई थी। इस बात की पुष्टि बीएसएफ पंजाब फ्रंटियर के आईजी अतुल फुलजेले ने भी की है।
गिरफ्तार किया गया पंजाब पुलिस का कर्मचारी करनदीप सिंह तरनतारन जिले में नौशहरा ढाला गांव के निकट का रहने वाला है। जांच एजेंसियों को संदेह है कि वह सीमा पार से संचालित नशा तस्करी नेटवर्क की मदद कर रहा था। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि आरोपी खुद नशे की लत से जूझ रहा था तथा उसके पास दो कारें होने की जानकारी सामने आई है। उसकी संपत्तियों, बैंक खातों और संभावित आर्थिक लेन-देन की जांच की जा रही है।
केंद्रीय एजेंसियों को अपने स्तर पर कार्रवाई करते हुए पुलिस विभाग के एक ऐसे कर्मचारी तक पहुंचना पड़ा, जिस पर नशा तस्करों की मदद करने का संदेह है, तो इससे विभागीय निगरानी, कर्मचारियों की गतिविधियों पर नजर रखने और खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान की व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
हालांकि, पंजाब पुलिस को ऑपरेशन की जानकारी न होने का अर्थ अपने आप में यह साबित नहीं करता कि विभाग को आरोपी की कथित गतिविधियों की पहले से जानकारी होनी चाहिए थी। लेकिन यह मामला जरूर इस बात की पड़ताल की जरूरत पैदा करता है कि संवेदनशील यूनिटों में तैनात कर्मचारियों की निगरानी, उनके आचरण की समीक्षा और संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करने का तंत्र कितना प्रभावी है।
बीएसएफ के पास कार्रवाई के लिए 50 किलोमीटर का अधिकार क्षेत्र
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 11 अक्टूबर, 2021 को अधिसूचना जारी कर पंजाब में अंतरराष्ट्रीय सीमा से बीएसएफ के परिचालन अधिकार क्षेत्र को 15 किलोमीटर से बढ़ाकर 50 किलोमीटर कर दिया था। इस विस्तारित क्षेत्र में बीएसएफ को निर्दिष्ट केंद्रीय कानूनों के तहत तलाशी, गिरफ्तारी और जब्ती जैसी कार्रवाई करने के अधिकार दिए गए। इनमें उस समय लागू दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC), पासपोर्ट अधिनियम और पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) अधिनियम जैसे कानून शामिल थे। इस विस्तार का उद्देश्य सीमा सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों के बीच बीएसएफ की परिचालन क्षमता बढ़ाना था। हालांकि, अधिकार क्षेत्र का विस्तार अपने आप में नशा तस्करी पर पूर्ण नियंत्रण की गारंटी नहीं है। सीमा पार से ड्रोन के जरिए नशीले पदार्थ भेजने वाले नेटवर्क से निपटने के लिए बीएसएफ, एनसीबी, पंजाब पुलिस और अन्य एजेंसियों के बीच समन्वय तथा विश्वसनीय खुफिया जानकारी का आदान-प्रदान भी महत्वपूर्ण है। मौजूदा मामले में केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई और पंजाब पुलिस की कथित अनभिज्ञता के बीच सामने आया अंतर इस समन्वय व्यवस्था की समीक्षा की जरूरत को रेखांकित करता है।
अब एनसीबी की जांच पर टिकी नजरें, अधिकारियों की हो सकती है शमूलियत
आईजी अतुल फुलजेले ने बताया कि गिरफ्तारी के बाद एनसीबी आरोपी से पूछताछ कर रही है। जांच एजेंसियां उसके आर्थिक लेन-देन, संपत्तियों और संभावित पुराने तस्करी मामलों से संबंधों की पड़ताल कर रही हैं। आगे की जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मामला एक कर्मचारी तक सीमित है या इसके पीछे व्यापक नेटवर्क काम कर रहा था। फिलहाल इस प्रकरण ने पंजाब पुलिस के सामने दो अहम सवाल खड़े किए हैं—पहला, संवेदनशील यूनिटों में तैनात कर्मचारियों की निगरानी कितनी प्रभावी है; और दूसरा, सीमा पार से होने वाली नशा तस्करी के खिलाफ काम कर रही विभिन्न एजेंसियों के बीच सूचनाओं का समन्वय कितना मजबूत है। इन सवालों के जवाब जांच के निष्कर्षों, विभागीय समीक्षा और जवाबदेही तय करने वाली कार्रवाई से ही सामने आएंगे। इसके अलावा पंजाब पुलिस के ही कुछ अधिकारियों की शमूलियत की भी जांच संभव है। यह भी स्पष्ट होना जरूरी है कि आरोपी के कथित नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल है, क्या किसी अन्य कर्मचारी या अधिकारी की भूमिका सामने आती है और क्या विभाग के भीतर पहले कोई चेतावनी या शिकायत मौजूद थी।