Thursday, September 17, 2026
loader-image
Jalandhar, IN
temperature icon 32°C
Breaking News

पंजाब कांग्रेस को उड़ान के रनवे पर ले आई ‘पायलट’ की एंट्री! चन्नी-वड़िंग की दूरी हुई कम

मनुपाल शर्मा, जालंधर : दिग्गजों की अंदरूनी गुटबाजी से जूझ रही पंजाब कांग्रेस को नवनियुक्त प्रभारी सचिन पायलट पंजाब में पैर रखते ही राजनीति की उड़ान के रनवे तक जरूर खींच कर ले आए हैंl कभी प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के नेतृत्व को लेकर सवाल, कभी पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और उनके समर्थकों की अलग सक्रियता, तो कभी वरिष्ठ नेताओं के बीच सार्वजनिक मतभेद। लेकिन अब तस्वीर कुछ बदली हुई दिखाई दे रही है। इस बदलाव के केंद्र में कांग्रेस के नए पंजाब प्रभारी सचिन पायलट ही हैं।

पंजाब की राजनीति में पायलट की एंट्री ऐसे समय हुई है जब कांग्रेस को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को एकजुट करने और आम आदमी पार्टी सरकार के खिलाफ एक प्रभावी विपक्षी अभियान खड़ा करने की जरूरत है। पंजाब में अपने पहले बड़े राजनीतिक कार्यक्रम में ही पायलट ने जिस तरह अलग-अलग खेमों के नेताओं को एक मंच पर खड़ा किया, उसने पार्टी की अंदरूनी राजनीति को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। 15 सितंबर का चंडीगढ़ प्रदर्शन इस बदलाव का सबसे बड़ा सार्वजनिक दृश्य बना।

गुलज़ार सिंह की मौत के मामले को लेकर वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा के आवास की ओर कांग्रेस के विरोध मार्च में सचिन पायलट, राजा वड़िंग, चरणजीत सिंह चन्नी, प्रताप सिंह बाजवा और सुखजिंदर सिंह रंधावा समेत कई वरिष्ठ नेता एक साथ दिखाई दिए। पायलट ने मंच पर चन्नी और वड़िंग के हाथ मिलवाकर एकता का सार्वजनिक संदेश भी दिया।

यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि कुछ ही समय पहले चन्नी और वड़िंग के बीच प्रदेश कांग्रेस के नेतृत्व और संगठनात्मक गतिविधियों को लेकर मतभेद चर्चा में थे। रिपोर्टों के मुताबिक दोनों खेमे अलग-अलग कार्यक्रम कर रहे थे और वरिष्ठ नेताओं की संयुक्त राजनीतिक सक्रियता सीमित दिखाई दे रही थी।

पायलट की कार्यशैली का एक महत्वपूर्ण संकेत यह है कि उन्होंने पंजाब आने से पहले ही वरिष्ठ नेताओं से संपर्क और विचार-विमर्श शुरू कर दिया था। 2027 के चुनाव की रणनीति, संगठन और नेताओं के बीच समन्वय को लेकर उन्होंने अलग-अलग नेताओं से फीडबैक लिया। अब पंजाब दौरे के बाद वह पार्टी नेतृत्व को अपनी रिपोर्ट देने वाले हैं।

पिछले कुछ समय में कांग्रेस की राजनीति में बड़े नेताओं के बीच खींचतान ने संगठनात्मक ऊर्जा का बड़ा हिस्सा अंदरूनी विवादों में खपाया। अब यदि पायलट उस ऊर्जा को सरकार के खिलाफ मुद्दों, संगठन विस्तार और बूथ स्तर की सक्रियता में बदल पाते हैं तो पार्टी की राजनीतिक सक्रियता का स्वरूप बदल सकता है।

रनवे तैयार है, उड़ान अभी बाकी है
पंजाब कांग्रेस की मौजूदा तस्वीर को अगर एक राजनीतिक रूपक में देखा जाए तो पायलट ने विमान को रनवे तक जरूर पहुंचा दिया है। चन्नी और वड़िंग का एक मंच पर आना, रंधावा और बाजवा की मौजूदगी, कार्यकर्ताओं को एकजुट करने का संदेश और सरकार के खिलाफ सड़क पर उतरने का फैसला-ये सभी संकेत बताते हैं कि कांग्रेस की राजनीतिक भाषा में बदलाव आया है।
लेकिन रनवे पर आ जाना और उड़ान भर लेना दो अलग बातें हैं।

अब देखना होगा कि पायलट इस एकता को कितने समय तक कायम रखते हैं, क्या पुराने राजनीतिक समीकरणों को नए संगठनात्मक अनुशासन में बदल पाते हैं और क्या कांग्रेस 2027 की लड़ाई को नेताओं की व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं से ऊपर उठाकर एक सामूहिक अभियान बना पाती है।

फिलहाल इतना जरूर कहा जा सकता है कि पंजाब कांग्रेस की राजनीति में ‘पायलट’ की एंट्री के बाद विमान के इंजन की आवाज सुनाई देने लगी है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि यह विमान रनवे से कब और किस दिशा में उड़ान भरता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *