भारत इंफो : कनाडा बॉर्डर सर्विसेज़ एजेंसी (CBSA) ने संगठित अपराध और जबरन वसूली (Extortion) के नेटवर्क को तोड़ने के लिए अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। कनाडा सरकार द्वारा चलाए जा रहे इस विशेष अभियान के तहत देश भर में अवैध गतिविधियों में लिप्त 81 लोगों को निष्कासित (Deport) कर दिया गया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस अभियान में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों के नाम सामने आए हैं, जो भारत के लिए चिंता का विषय है।
एजेंसी के आधिकारिक आंकड़े और जांच का दायरा
CBSA की रिपोर्ट के अनुसार, 18 जून 2026 तक जबरन वसूली से जुड़े मामलों में कुल 484 आव्रजन जांच (Immigration Investigations) शुरू की गई हैं। एजेंसी ने अब तक 139 निष्कासन आदेश जारी किए हैं, जिन पर अमल की प्रक्रिया जारी है। सबसे अधिक कार्रवाई ब्रिटिश कोलंबिया (पैसिफिक रीजन) में हुई है, जहाँ मेट्रो वैंकूवर और सरे (Surrey) क्षेत्र में 150 से अधिक जांच शुरू की गई हैं। वहीं, ग्रेटर टोरंटो एरिया (GTA) और कैलगरी-एडमोंटन जैसे शहरों में भी पुलिस और आव्रजन एजेंसियां गैंग हिंसा के खिलाफ लगातार छापेमारी कर रही हैं। हालांकि CBSA ने राष्ट्रीयता के आधार पर अलग से आंकड़े जारी नहीं किए हैं, लेकिन सार्वजनिक किए गए मामलों में करीब दो दर्जन से अधिक लोग भारतीय नागरिक हैं।
कानून का सख्त रुख और सार्वजनिक सुरक्षा मंत्री का संदेश
कनाडा के सार्वजनिक सुरक्षा मंत्री गैरी आनंदसांगरी (Gary Anandasangaree) ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि देश में आपराधिक गतिविधियों में लिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि अगस्त 2025 से शुरू हुआ यह अभियान अब उन सभी प्रमुख शहरों में फैल चुका है जहां रंगदारी और गैंग हिंसा ने आम जनता का जीना दुश्वार कर रखा था। मंत्री ने जोर देकर कहा कि जिन लोगों के पास कनाडा में रहने का कानूनी अधिकार नहीं है और जो समाज के लिए खतरा बने हुए हैं, उन्हें तत्काल प्रभाव से देश से निकाला जाएगा।
भारतीय मूल के लोगों पर शिकंजा और आपराधिक मामले
कैलगरी पुलिस ने भी इस मामले में कड़ी कार्रवाई करते हुए 16 भारतीय मूल के लोगों पर 56 गंभीर आपराधिक आरोप लगाए हैं। हाल ही में सरे में घर पर हुई फायरिंग की घटना के बाद पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें से दो की पहचान अरमान सिंह और सिमरजीत सिंह के रूप में हुई है। इन पर लापरवाही से गोली चलाने का मामला दर्ज है। पुलिस ने पुष्टि की है कि ये सभी विदेशी नागरिक हैं, जिसके चलते अब इनके मामले में CBSA भी सीधे तौर पर शामिल हो गई है। यह लगातार बढ़ती गिरफ्तारियां और निष्कासन कनाडा में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए एक गंभीर चेतावनी और चिंता का विषय बन गई हैं।