Tuesday, February 17, 2026
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जालंधर पास्टर अंकुर नरूला के बयान पर पीड़ित परिवार भड़का, कहा- ऐसे बयान ने जख्मों पर नमक छिड़का

भारत इंफो : जालंधर वेस्ट हलके के पारस एस्टेट में 13 वर्षीय मासूम बच्ची की निर्मम हत्या के मामले में आरोपी हरमिंदर सिंह उर्फ रिंपी को लेकर दिए गए पास्टर अंकुर नरूला के बयान ने विवाद को और गहरा कर दिया है। पास्टर के बयान के बाद अब पीड़ित परिवार खुलकर सामने आ गया है और उन्होंने इसे बेहद आहत करने वाला बताया है।

पास्टर के बयान से भड़का परिवार
हाल ही में दिए गए एक बयान में पास्टर अंकुर नरूला ने कहा था कि उनका काम पापियों को माफी का संदेश देना है और चर्च एक “स्पिरिचुअल अस्पताल” है। उन्होंने बाइबल का हवाला देते हुए कहा कि यीशु मसीह पापियों के लिए आए थे और प्रभु गलत करने वालों को भी माफ कर देते हैं। इस बयान के बाद पीड़ित बच्ची के परिवार में भारी रोष देखा जा रहा है।

पीड़ित परिवार ने कहा कि इस बयान से आज सब कुछ साफ हो गया है। परिवार का कहना है कि उनकी बेटी के साथ हुई दरिंदगी और उसकी मौत से न केवल पंजाब, बल्कि पूरा देश दुखी है। ऐसे में प्रभावशाली लोग इस संवेदनशील मामले को झूठी शोहरत के लिए गलत दिशा में ले जा रहे हैं, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

‘ऐसे बयान ने हमारे जख्मों पर नमक छिड़का’
परिवार ने कहा कि पास्टर द्वारा दोषी को माफ करने की बात करना उनके लिए असहनीय है। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि अगर ऐसा ही है तो देश की जेलों में बंद सभी हत्या और बलात्कार के आरोपियों को रिहा कर दिया जाए और पास्टर उन्हें अपने घर ले जाएं। परिवार का कहना है कि पास्टर के इस बयान ने उनके दर्द को और गहरा कर दिया है।

रेप केस में बंद पास्टर बलजिंदर का उठाया मुद्दा
पीड़ित परिवार ने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर पाप माफ किए ही जा सकते हैं तो रेप केस में जेल में बंद पास्टर बलजिंदर के पाप क्यों माफ नहीं हुए। परिवार ने कहा कि इस पूरे मामले में अब तक किसी भी आम व्यक्ति ने आरोपी को माफ करने की बात नहीं कही, लेकिन अकेले पास्टर अंकुर नरूला ही ऐसा बयान दे रहे हैं, जिससे यह संदेह और गहरा होता है।

‘अगर साथ नहीं दे सकते तो चुप रहें’
परिवार ने स्पष्ट कहा कि पास्टर को इस तरह का बयान नहीं देना चाहिए था। उनका कहना है कि अगर कोई उनके साथ खड़ा नहीं हो सकता तो कम से कम ऐसे बयान देकर उनके दर्द को बढ़ाने की जरूरत नहीं है। परिवार ने दो टूक कहा कि इस तरह की टिप्पणियां न्याय की लड़ाई को कमजोर करती हैं और पीड़ितों के घावों को कुरेदने का काम करती हैं।

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